इजराइली मुखबिर

उदहारण

इजराइली रक्षा बल (आईडीएफ) में अपनी सेवा के दौरान पत्रकार अनत कम्म ने 2000 वर्गीकृत सैन्य दस्तावेजों को लीक किया था जिसके कारण उसे  अक्टूबर 2011 में साढे चार साल की सजा सूनाई गयी थी। दस्तावेज, जो हारेट्ज के संवाददाता उरी ब्लाउ को लीक किया गया था, से पता चलता है कि वेस्ट बैंक में इजरायल के सुरक्षा बलों ने दो फिलिस्तीनी उग्रवादियों की हत्या करना लक्षित हत्या पर 2006 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना थी।

न्याय मंत्रालय ने कहा कि मामला “असाधारण रूप से गंभीर” है चूंकि दस्तावेज में सैन्य योजनाओं के विवरण शामिल थे। लीक के कारण, कम्म को जासूसी करने के लिए गुप्त घर में नजरबंद रखा गया था और एक अदालत द्वारा लगाई गई बड़ी निषेधाज्ञा से मामले या झूठे तथ्यों पर रिपोर्टिंग से मीडिया को रोका गया। इसके बावजूद, इस घटना को विदेशी मीडिया और ब्लॉगर्स द्वारा उठाया गया था।

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लेखक की राय

दुनिया में सभी सुरक्षा बलों की तरह, ईडीएफ आलोचना से ऊपर नहीं है। जबकि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बहस यह हो सकता है कि वर्गीकृत जानकारी को  छिपाकर रखा जाए, उदाहरण के लिए लीक को मामले दर मामले के आधार पर जांच की जानी चाहिए। इस उदाहरण में, कम्म के पास दस्तावेज लीक करने का अधिकार था, जो बताता है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन किया गया था। यह जानकारी इसलिए सार्वजनिक हित में था और मीडिया के पास खबर करने का अधिकार था।

एक बड़ी निषेधाज्ञा का उपयोग करके, अधिकारियों ने लीक की वैधता पर बहस को दबा दिया, पत्रकारों को भी भविष्य में ईडीएफ के बारे में संवेदनशील घटनाओं को कवर करने से रोका जा सकता है। विदेशी मीडिया द्वारा घटना के कवरेज द्वारा धोखे को आगे हास्यास्पद बन गया, आज के परस्पर जुड़ी दुनिया में बड़ी रोक अक्सर निरर्थकता को रेखांकित करता है।

- मरयम ओमिदी

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Comments (2)

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  1. Surely “the public interest” is not necessarily the most telling criterion. I have the greatest admiration for whistle-blowers, but there is often more than one way to achieve one’s noble aim. The theft or disclosure of military documents was illegal. But again, illegality is not a sacrosanct principle to be observed at all times. I would have advised this fine young woman to try other ways before resorting to the extreme measure she decided on.

  2. I agree that it is entirely ridiculous for Kamm to have been given a jail sentence for this “crime” as the information was unquestionably in the public interest

    The issue here is not whether the information that was leaked contained military plans, but that the IDF acted in defiance of a supreme court ruling and in doing so demonstrated their belief that they are above the law. This belief violates one of the most basic tenants of democratic society; that no one is above the law, be they civilian, politician, or military body.

    The worrying decision to impose a super-injunction on the case suggests that important elements within Israeli society may agree that the IDF should not be held accountable for their actions.

    The Israeli people, have the right to know about this kind of conduct to allow them to make informed decisions at the ballot box.

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'वाक्-स्वतंत्रता पर चर्चा' ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सेंट एंटनी कॉलेज में स्वतंत्रता के अध्ययन पर आधारित दह्रेंदोर्फ़ कार्यक्रम के अंतर्गत एक अनुसन्धान परियोजना है www.freespeechdebate.com

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